बक्सर: जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को हुई एक समीक्षात्मक बैठक में चौसा, ब्रह्मपुर और सिमरी प्रखंड के BEO (प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी) फर्जी शिक्षक नियुक्तियों और अनुपस्थित शिक्षकों पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से तीनों BEO का वेतन रोकते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया।
बैठक में उप विकास आयुक्त को लंबित नियोजन मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वेतन की वसूली की जाएगी। शिक्षा विभाग की एक आंतरिक जांच में यह सामने आया कि दर्जनों शिक्षक बिना वैध प्रमाणपत्रों के वर्षों से कार्यरत हैं।
टोला सेवक और तालीमी मरकज की गतिविधियों की गहन जांच के निर्देश भी जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही अवैध रूप से संचालित स्कूल वाहनों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। दर्जनों स्कूल बसें बिना परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र के बच्चों को ढो रही थीं। प्रशासन ने ऐसे वाहनों की पहचान कर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बैठक में एमपी उच्च विद्यालय, बक्सर को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना की समीक्षा भी की गई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा दी गई जानकारी असंतोषजनक पाए जाने पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मध्याह्न भोजन) को विद्यालय का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि, “शिक्षा व्यवस्था में सुधार अब टालने योग्य नहीं है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आया तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।” बक्सर में शिक्षा विभाग से जुड़ी अनियमितताएं पहले भी चर्चा में रही हैं और अब देखना होगा कि ये कार्रवाई वास्तविक सुधार की दिशा में कदम साबित होती है या सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित रह जाती है।